शनिवार, 14 मार्च 2020

कोरोना वायरस

एकाकीपन क्लांत मन को 

एकांत में जाने को कहता
 
कोरोना वायरस महामारी को 

हतोत्साह के साथ संसार सहता। 


तमस का अंबार है छाया 

वक़्त विकट महामारी लाया

5000 लोग काल-कवलित हुए 

लाख से ऊपर संक्रमित हुए। 


दुनिया में देश जुट गये हैं 

अपने-अपने नागरिकों की जान बचाने 

सुरक्षा उपायों हेतु 

खुल गये हैं सरकारी खज़ाने। 


मृत्यु का भय महाविकट रोग है 

कालाबाज़ारी का यह कैसा योग है 

फ़ेस मास्क सेनिटाइज़र ग़ाएब हुए 

मानवता पर क़ुदरत का कठिन प्रयोग है।  

© रवीन्द्र सिंह यादव 

6 टिप्‍पणियां:

  1. मानवता पर कुदरत का कठिन प्रयोग है।
    संवेदनशील मन की चितनीय अभिव्यक्ति।
    समसामयिक परिस्थितियों पर आपका चिंतन सदैव सराहनीय है।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17 -3-2020 ) को मन,मानव और मानवता (चर्चा अंक 3643) पर भी होगी,
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  4. समय को साधती प्रभावी रचना
    बहुत सुंदर सृजन
    सादर

    पढ़ें- कोरोना

    जवाब देंहटाएं
  5. आपसी समझ की सख्त ज़ररुत है
    बचाव ही दवा है पर अफ़सोस कुछ के ना समझने के कारण बहुतों को नुक्सान झेलना पढ़ रहा है


    सामायिक रचना

    जवाब देंहटाएं
  6. समसामयिक सृजन , जो मानवता पर छाए कोरोना नाम की विकट आपदा पर व्यापकता से दृष्टिपात करती है। सचमुच ये मानवता पर बहुत ही कठिन प्रयोग है।

    जवाब देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

शब्द अर्थ पाएँगे

शब्दोदधि में डूब जाओ  मुक्ता-से शब्द ढूँढ़ लाओ  ये घिसे-पिटे  उबाऊ चुभते  रसीले शब्दों ने  मन खिन्न किया है  कानों में गूँजते  ...