सोमवार, 19 अगस्त 2019

नशेमन


निर्माण नशेमन का 

नित करती, 

वह नन्हीं चिड़िया 

ज़िद करती। 


तिनके अब 

बहुत दूर-दूर मिलते, 

मोहब्बत के 

नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलते।


ख़ामोशियों में डूबी 

चिड़िया उदास नहीं, 

दरिया-ए-ग़म का 

किनारा भी पास नहीं। 


दिल में ख़लिश 

ता-उम्र सब्र का साथ लिये, 

गुज़रना है ख़ामोशी से 

हाथ में हाथ लिये।  


शजर की शाख़ पर 

संजोया है प्यारा नशेमन, 

पालना है पीढ़ी को 

हो क़ाबिल ऊँची उड़ान के लिये।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

7 टिप्‍पणियां:

  1.  जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 19 अगस्त 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. अपनी जिम्मेवारियों को पूर्ण करने का साहस राहत हिया हमेशा उस नन्ही चिड़िया में ...
    अच्छी रचना ...

    जवाब देंहटाएं
  3. शजर की शाख़ पर

    संजोया है प्यारा नशेमन,

    पालना है पीढ़ी को

    हो क़ाबिल ऊँची उड़ान के लिये।
    भले चिड़िया चिड़िया है पर ममत्व से दूर कहाँ ? संतति के पालन पोषण का भर तो लेगी ही अपने सर | बेहद भावपूर्ण रचना रवीन्द्र जी | आपका मौलिक अंदाज इसे और विशेष बना देता है| सादर सस्नेह शुभकामनायें |

    जवाब देंहटाएं
  4. दिल में ख़लिश
    ता-उम्र सब्र का साथ लिये,
    गुज़रना है ख़ामोशी से
    हाथ में हाथ लिये।
    बहुत ही हृदयस्पर्शी लाजवाब सृजन...

    जवाब देंहटाएं

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