मंगलवार, 13 अगस्त 2019

कश्मीरी लड़की



हाँ मैं कश्मीरी लड़की हूँ! 

अपने देशवासियों पर भड़की हूँ। 

मेरा रंग और बदन पसंद तुम्हें, 

ये मनोविकार हैं नापसंद मुझे,

गुल बनो!

गुलफ़ाम को लेने,

आ जाना गुलशन में!

बदल सकोगे जलवायु?

जिसमें पलकर मैं बड़ी हुई  

सुमन पाँख-सी कोमल हूँ 

स्त्री का सम्मान करो बदलो सोच सड़ी हुई।   

ईद मुबारक उन्हें भी 

जो मेरे रंगरूप पर मोहित हैं

ज़ेहन में सिर्फ़ भोग्या का भाव रखते हैं!

© रवीन्द्र सिंह यादव 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में शुक्रवार 16 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. मेरा रंग और बदन पसंद तुम्हें,
    ये मनोविकार हैं नापसंद मुझे,
    धारा 370 के हटने के बाद से जिस तरह लोग मैसेज के जरिये कश्मीरी लड़कियों की सुन्दरता को लेकर फब्तियाँ कस रहे हैं सचमुच ऐसे मनोविकारियों पर ऐसा करारा तमाचा लगना ही चाहिए... बहुत ही लाजवाब सृजन आपका ।

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  3. Stri ke prati kalushit mansikta par karara prahar karti rachna

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  4. काश्मिरी बाला की मन की पीड़ा को व्यंग रूप देकर सुंदर भाव उकेरे हैं रचना में ।
    कलुषित भावों पर प्रहार करता सटीक सृजन।

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  5. बहुत खूब आदरणीय रवीन्द्र जी | एक भद्दी सोच से जन्मी कश्मीरी लडकी की आंतरिक व्यथित मानसिकता को सर्थकता से उकेरा है | सभ्य समाज को अपनि इस कुत्सित मानसिकता से दूर जाना ही होगा | बहुत धारदार रचना लिखी आपने जो नारी का सम्मान बढाती है | सादर

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