गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

विटामिन डी ( वर्ण पिरामिड )

ये
धूप
रोकती
अट्टालिका
सहते     हुए
हड्डियों का दर्द
कोसते धूप-बाधा।



रोको
सौगात
क़ुदरती
भास्कर देता
निदाघ निर्बाध
विटामिन डी मुफ़्त।



हो
गया
शहरी
सिटीज़न
छाँव का आदी
घाम के दर्शन
हैं सुकून की वादी। 


है
धूप
गायब
तहख़ाने
हाट-बाज़ार
दवाई-दवाई
जेब ख़ूब चिल्लाई।  


लो 
घुटा  
इंसान 
अभिव्यक्ति 
तलाशती     है 
छायावादी  युग 
प्रगति के सोपान। 

ये 
पौधे 
पोषित 
पल्लवित  
पंछी उड़ान 
प्यारा कलरव
धूप का ही साम्राज्य।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

निदाघ = गर्मी, ताप, धूप 



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