सोमवार, 15 अक्तूबर 2018

प्यार का महल (क्षणिका)



तुम्हारे प्यार का 

रंगीन महल 

मुकम्मल  होने से पहले 

क्यों ढहता है 

बार-बार 

भरभराकर 

शायद तुमने 

चालूपने की 

ख़स्ता-हाल 

ईंटें  चुनी है   

प्यार को 

रुस्वा किया है 

जज़्बात का 

नक़ली सीमेंट लगाकर।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

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