बुधवार, 12 सितंबर 2018

दो क्षणिकाऐं

                                                                             
1.

जनता कहती 

सता रही है 

महँगाई की मार

नेताओं को 

पहनाओ अब 

सूखे पत्तों के हार। 

लेने वोट हमारा 

नेता 

झुकते बारम्बार

जीत गये तो 

इनका सजता  

सुरक्षित शाही दरबार।  




2. 


इबादत-गाहों में 

रहते कैसे-कैसे 

परमेश्वर के 

सेवादार

शराफ़त का हैं 

ओढ़े लबादा 

 पतित अधर्मी 

धर्म के ठेकेदार। 
  
© रवीन्द्र सिंह यादव



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

यह कैसा जश्न है ?

अंगारे आँगन में  सुलग-दहक रहे हैं,  पानी लेने परदेश  जाने की नौबत क्यों ? न्यायपूर्ण सर्वग्राही  राम राज्य में ...