शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

शब्द ऊर्जा है


दिल-नशीं हर्फ़

सुनने को

बेताब हो दिल

कान को

सुनाई दें

ज़हर बुझे बदतरीन बोल

क़हर ढाते हाहाकारी हर्फ़

नफ़रत के कुँए से

निकलकर आते 

तीर-से चुभते शब्द 

तबाही का सबब

बनते बिगड़े बोल 

भरा हो जिनमें

ख़ौफ़ और दर्प

तो

कुछ तो ज़रूर करोगे.....

कान बंद करोगे ?

बे-सदा आसमान से

कहोगे-

निगल जाओ इन्हें

या

भाग जाओगे

सुनने सुरीला राग


वहाँ

जहाँ

बाग़ की फ़ज़ा

बदलने के इंतज़ार में

दुबककर बैठी है

मासूम कोयल!

शब्द ऊर्जा है

रूप बदलकर

ब्रह्माण्ड में रहेगा

सामूहिक चेतना में

रचेगा-बसेगा

सोचो!

समाज कैसा बनेगा ?

© रवीन्द्र सिंह यादव


शब्दार्थ / WORD MEANINGS

दिल-नशीं= दिल में रहने वाला/वाले, RESIDING IN THE             HEART 
  
हर्फ़= शब्द / WORD 

बदतरीन=सबसे बुरा / WORST 

सबब=कारण /REASON,CAUSE 

दर्प=अभिमान,घमण्ड / ARROGANCE 

बे-सदा=मौन,बे-आवाज़ / VOICELESS  

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