शनिवार, 2 जून 2018

कमाई का हक़ जब माँगता है किसान...

बाँझ हो जाती है 
ज़मीं
नक़ल बाज़ार की  
करता है 
जब किसान 
सरकार को 
आता है पसीना
पसीने की 
कमाई का भाव  
जब माँगता है किसान।  



#रवीन्द्र सिंह यादव 

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-10-2020) को    "विजयादशमी विजय का, है पावन त्यौहार"  (चर्चा अंक- 3865)     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    विजयादशमी (दशहरा) की 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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