शनिवार, 19 मई 2018

आओ! राष्ट्रीय-चरित्र पर मंथन करें.....

आओ!
मनगढ़ंत, मनपसन्द, मन-मुआफ़िक, मन-मर्ज़ी का 
इतिहास पढ़ें, 
अज्ञानता का विराट मनभावन 
आनंदलोक गढ़ें। 
आओ! 
बदल डालें 
सब इमारतों,गलियों,शहरों, सड़कों, संस्थानों के नाम, 
लिख दें बस अपने-अपनों के नाम। 
आओ! 
बदल डालें 
कुछ क़ानून-क़ाएदे भी, 
होंगे दूरगामी फ़ाएदे भी।  
आओ! 
पाठ्यक्रम भी बदल डालें,
अपनों को उपकृत करें और बौद्धिक विकास में भी ख़लल डालें।  
आओ! 
पेपर लीक कर लें,
प्रतिभा को रौंदकर अपनी तिजोरी भर लें। 
आओ! 
कॉर्पोरेट के तलवे चाटें, 
राष्ट्रीय सम्पदा लुटाएं और चंदे की ख़ैरात को आपस में बाँटें।  
आओ!
बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक खेल खेलें,
काटें नफ़रत से उगाई फ़सल व  बेलें। 
   
आओ!
राष्ट्रवाद का नगाड़ा बजाएं, 
शून्य से मुद्दों को पैदाकर अखाड़ा बनाएं।  
आओ!
नई पीढ़ी का भविष्य सँवारें,  
कैसे ???????????????????????
परिष्कृत ज्ञान और दक्षता के लिए 
कब तक विदेश के पाँव पखारें ??? 
आओ!
राष्ट्रीय-चरित्र पर मंथन करें, 
कल के लिए आत्मावलोकन करें।   

#रवीन्द्र सिंह यादव  

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