यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

तस्वीर

वर्षों से दीवार पर टंगी 

तस्वीर से 

धूल साफ़ की 

आँखों में 

करुणा की कसक 

हया की नज़ाकत 

मुस्कान के पीछे 

छिपा  दर्द 

ये आज भी फीके कहाँ  

चीज़ों की उम्र होती है 

प्रेम की कहाँ 

लेकिन आँखों ने 

इशारों में कहा है 

अब प्रेम का दायरा 

सिकुड़ता जा रहा है। 

#रवीन्द्र सिंह यादव 

विशिष्ट पोस्ट

आओ! राष्ट्रीय-चरित्र पर मंथन करें.....

आओ! मनगढ़ंत, मनपसन्द, मन-मुआफ़िक, मन-मर्ज़ी का  इतिहास पढ़ें,  अज्ञानता का विराट मनभावन  आनंदलोक गढ़ें।  आओ!  बदल डालें  सब इमारत...