बुधवार, 18 अप्रैल 2018

सुमन और सुगंध

सुगंध साथ सुमन के 

महकती 

ख़ुशी से रहती है, 

ये ज़ंजीर न बंधन के 

चहकती 

ख़ुशी से रहती है। 

फूल खिलते हैं 

हसीं रुख़ देने 

नज़ारों को,  

तितलियाँ 

आ जाती हैं 

बनाने ख़ुशनुमा 

बहारों को। 

कभी  ढलकता है 

कजरारी आँख से 

उदास  काजल, 

कहीं रुख़ से 

सरक जाता है 

भीगा आँचल। 

परिंदे भी आते हैं  

ख़ामोश चमन में 

पयाम-ए-अम्न लेकर, 

न लौटा कभी 

गुलिस्तान  से 

भारी मन लेकर।  

#रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ / WORD  MEANINGS 

सुगंध = महक, ख़ुशबू / FRAGRANCE 

सुमन = पुष्प , फूल / FLOWER 

ज़ंजीर= साँकल ,शृंखला / CHAIN 

,हसीं = सुन्दर ,ख़ूबसूरत / BEAUTIFUL 

कजरारी आँख = आँख जिसमें काजल लगा हो , काजलयुक्त आँख / EYE WITH KOHL 

रुख़ = चेहरा ,दृटिकोण , चेहरे पर नज़र आने वाला भाव, दिशा  /  FACE , APPEARANCE, DIRACTION  

चमन = बाग़/  FLOWER GARDEN  

पयाम-ए-अम्न= शान्ति का सन्देश / MESSAGE OF PEACE 

गुलिस्तान= बाग़ / FLOWER GARDEN 

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