रविवार, 14 जनवरी 2018

कोई रहगुज़र तो होगी ज़रूर ....


चलते-चलते 

आज यकायक 

दिल में 

धक्क-सा हुआ 

शायद आज फिर 

बज़्म में आपकी 

बयां मेरा अफ़साना हुआ



फ़क़त मेरे दिल में हों 

बेताबियाँ 

ऐसा भी तो नहीं 

ख़्वाब में आप भी 

कूचा-कूचा 

तलाशते हो मुझे 



राहत की बात है 

हमने अब तक 

कुछ तो बचाये रखा है 

चिलमन में 

लेकर ख़्याल मेरा 

न झाँकना आईने में 

शैदा ख़ुद पे होने से 

ख़ुद को 

कैसे रोक पाओगे .....?



मुतमइन बैठा हूँ 

मैं तो घने पेड़ की छाँव में 

डूबने को जब सूरज हो 

सुनसान राहों पर 

ख़ुद को बचाकर चलना

कोई रहगुज़र-ए-दिल   

तो होगी ज़रूर 

जो ले आएगी मुझ तक.........?  

#रवीन्द्र सिंह यादव 


शब्दार्थ / WORD  MEANINGS 

1.  यकायक = अचानक / All of a sudden 
2.  बज़्म= गोष्ठी ,महफ़िल / Meeting , Feast 
3.   फ़क़त= सिर्फ़ / Only 
4.  कूचा= गली / Lane , Narrow Street 
5.  चिलमन= पर्दा ,Curtain 
6.  शैदा= मुग्ध,आसक्त  / Enamored  
7.  मुतमइन = संतुष्ट ,शांतचित्त, Satisfied, Secure,Quiet 
8.  रहगुज़र-ए-दिल =  दिल तक पहुँचने वाली राह / Path Of  Heart 
     


1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (07-01-2020) को   "साथी कभी साथ ना छूटे"   (चर्चा अंक-3573)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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