मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

धन तेरस

कार्तिक मास कृष्णपक्ष त्रियोदशी 
धन तेरस शुभता लायी, 
समुद्र-मंथन में आयुर्वेद,अमृत-कलश ले 
धनवंतरि के प्राकट्य की तिथि आयी। 
बर्तन,मूर्ति,सिक्के,शृंगारिक साजो-सामान 
 हैं बाज़ार के प्रलोभन,
त्योहार हैं संस्कृति के अंग 
 दृढ़ रखिये चंचल मन।   
यथाशक्ति कीजिये 
धन तेरस का स्वागत, 
त्यागकर अनुचित अँधानुकरण आग्रह 
संयमित हो तय कीजिये 
त्योहार की लागत।
ख़ुशियाँ सबके घर-आँगन  छायें,
धन तेरस की मंगलकामनाएँ।  

#रवीन्द्र सिंह यादव    

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

विशिष्ट पोस्ट

अपना-अपना आसमान

पसीने से लथपथ  बूढ़ा लकड़हारा  पेड़ काट रहा है शजर की शाख़ पर  तार-तार होता  अपना नशेमन  अपलक छलछलाई आँखों से  निहार रही है एक गौरैया अंतिम तिन...