शनिवार, 16 सितंबर 2017

खाता नम्बर


ग़ौर से देखो गुलशन  में 

बयाबान का साया है ,

ज़ाहिर-सी बात है 

आज फ़ज़ा ने जताया है। 




इक  दिन  मदहोश  हवाऐं 

कानों  में  कहती  गुज़र  गयीं,

 उम्मीद-ओ-ख़्वाब  का  दिया 

हमने  ही  बुझाया  है।   



आपने अपना खाता नम्बर  

विश्वास  में  किसी  को  बताया है,

तभी तो तबादला होकर दर्द 

आपके हिस्से में आया है।   



दर्द अंगड़ाई ले लेकर  

जाग उठता है  पहर-दर-पहर, 

कुछ ब्याज का हिस्सा भी 

बरबस आकर समाया है। 



आपके तबस्सुम में रहे 

वो  रंग-ओ-शोख़ियां  अब  कहाँ ?

उदास तबियत का 

दिन-ओ-दिन  भारी  हुआ  सरमाया  है। 



बिना अनुमति के खाते में 

न कुछ जोड़ा जाए,

अब जाकर राज़दार का पता 

बैंक से की इल्तिजा में बताया है।   

#रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ / पर्यायवाची  / WORD MEANINGS

ग़ौर से = ध्यान से, TO BE  FOCUSED 
गुलशन = फूलों का बगीचा / FLOWER GARDEN  
बयाबान =जंगल ,वीराना / WILDERNESS 
साया = छाया,शरण  / SHADOW,SHADE ,SHELTER  
फ़ज़ा= वातावरण ,परिवेश /AMBIENCE 
खाता =ACCOUNT 
ब्याज =INTEREST 
तबादला=स्थानांतर,बदली होना  / TRANSFER 
तबस्सुम =मुस्कराहट / SMILE 
शोख़ियाँ =शरारतें / MISCHIEF   
सरमाया =पूँजी ,संपत्ति / CAPITAL /WEALTH 
राज़दार = राज़/ रहस्य / गुप्त बातें  जानने वाला / FAITHFUL 
इल्तिजा  = विनती ,अनुरोध ,प्रार्थना / REQUEST 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (09-09-2020) को   "दास्तान ए लेखनी "   (चर्चा अंक-3819) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सही सटीक खाका खींचा है आपने ऐसा ही हो रहा है ।
    सार्थक चेतावनी।

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय रवींद्र सिंह यादव जी, नमस्ते👏!
    आपके हर शेर पर वाह कहने को मन करता है। क्या बात है!
    दर्द अंगड़ाई ले लेकर
    जाग उठता है पहर-दर-पहर,
    कुछ ब्याज का हिस्सा भी
    बरबस आकर समाया है।
    मैंने आपका ब्लॉग अपने रीडिंग लिस्ट में डाल दिया है। कृपया मेरे ब्लॉग "marmagyanet.blogspot.com" अवश्य विजिट करें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएं।
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    सादर!--ब्रजेन्द्रनाथ

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