गुरुवार, 25 मई 2017

नज़दीकियाँ



ज़रा-ज़रा  सी   बात   पर

रूठना, मचलना  भा गया ,

देखने   चकोर   चाँद   को

नदी   के  तीर  आ  गया। ........ (1)


गुफ़्तुगू    न   सुन    सके

कोई  मिलन  न  देख  ले,

दो    दिलों  के  आसपास

बन  के  शामियाना  कोहरा  छा  गया।

देखने  चकोर  चाँद  को

नदी  के  तीर  आ  गया। ........ (2)


ये     घड़ी     रुकी     रहे

रात    जाए   अब   ठहर,

दीवानगी  का ये  ख़याल

बेताबियों  को  भा  गया।

देखने   चकोर  चाँद  को

नदी  के  तीर   आ  गया। ......... (3)


ज़िन्दगी     की      राहों     में

फूल      हैं     तो     ख़ार    भी  ,

पयाम    एक   फ़ज़ाओं    का  

मरहम ज़ख़्म  पर लगा गया।

देखने      चकोर     चाँद    को

नदी     के    तीर   आ     गया। ........ (4)


तमन्नाऐं    बन  के    रौशनी

जगमगाती  हैं    डगर -डगर ,

बेख़ुदी     के        दौर       में

भूली  राह  कोई  दिखा गया।

देखने   चकोर      चाँद    को

नदी  के    तीर   आ     गया। ........ (5)

@रवीन्द्र सिंह यादव

इस रचना को सस्वर सुनने के लिए लिंक -
https://youtu.be/s0aRSv3IenI

शब्दार्थ / WORD  MEANINGS -

ज़रा = थोड़ी ,थोड़ा ,A  Bit 

चकोर = तीतर की भांति दिखने वाला पक्षी जो साहित्य में चन्द्रमा के प्रेमी के रूप में वर्णित है ,Alectoris          chukar 

तीर = किनारा ,बाण , River Bank 

गुफ़्तुगू =बातचीत ,Speech ,Conversation 

शामियाना = मंडप ,वितान ,छत्र , Canopy  ,Awning 

कोहरा = कुहासा ,Fog,Mist 

घड़ी = पल , moment 

दीवानगी = पागलपन , होश-ओ हवास  खोना -Madness  ,Insanity

ख़याल = विचार ,Thought ,Idea 

बेताबियाँ = बेसब्री,बेचैनी  ,Restlessness 

ख़ार = काँटा  , A Thorn 

पयाम = संदेश , Message 

फ़ज़ाओं =  वातावरण ,Weather, Atmosphere 

तमन्नाऐं = इच्छाएँ ,Desires 

डगर = रास्ता ,Path ,Road 

बे-ख़ुदी = स्वयं को भूल जाना ,Intoxication 


7 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (३०-११ -२०१९ ) को "ये घड़ी रुकी रहे" (चर्चा अंक ३५३५) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. ज़िन्दगी की राहों में
    फूल हैं तो ख़ार भी ,
    पयाम एक फ़ज़ाओं का
    मरहम ज़ख़्म पर लगा गया।
    देखने चकोर चाँद को
    नदी के तीर आ गया। ........ (4)
    बहुत ही सुन्दर मनभावन लाजवाब सृजन...
    लयबद्ध....
    वाह!!!!

    जवाब देंहटाएं
  3. https://youtu.be/s0aRSv3lenl
    ये लिंक खुल नही रहा है रविन्द्र जी !
    आपकी आवाज में इस सुन्दर सृजन को सुन नहीं पायी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

      हटाएं
    2. सादर आभार आदरणीय सुधा जी। आपकी मनोबल बढ़ाती टिप्पणी और सूचना का तह-ए-दिल स्वागत। अब वीडियो का लिंक दुरुस्त कर दिया है। सही लिंक नीचे दिया है -

      https://youtu.be/s0aRSv3IenI ज़रा-ज़रा सी बात पर

      हटाएं

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