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दो पल विश्राम के लिए

 छतनार वृक्ष की छाया में    दो पल सुस्ताने का मन है, वक़्त गुज़रने की चिंता में  चलते रहने का वज़न है। कभी बहती कभी थमती है बड़ी मनमौजन है पुरवा...