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शनिवार, 20 अक्तूबर 2018

रेल-हादसा (वर्ण पिरामिड)



1. 

था 

क्रूर 

हादसा 

दशहरा 

अमृतसर 

रेल-रावण को 

दोष मढ़ते हम। 


2. 

ये

नेता  

मौत में 

तलाशते 

अपनी जीत 

सम्वेदना लुप्त 

दोषारोपण ज़ारी। 


3. 

वे 

लेते 

वेतन 

सरकारी 

हैं अधिकारी 

ओढ़ते लाचारी 

क्यों जनता बेचारी? 



4. 

थी 

एक 

जिज्ञासा 

रावण को 

देखें जलता 

विडियो बनाते 

क्षत-विक्षत हुए। 


5. 

है 

छाया 

मातम 

शहर में 

चीख़-पुकार 

 है मौन मंज़र 

हुए यतीम बच्चे।  

© रवीन्द्र सिंह यादव 

रेल-हादसा (वर्ण पिरामिड) 

मंगलवार, 16 अक्तूबर 2018

प्यार का महल (क्षणिका)



तुम्हारे प्यार का 

रंगीन महल 

मुकम्मल  होने से पहले 

क्यों ढहता है 

बार-बार 

भरभराकर 

शायद तुमने 

चालूपने की 

ख़स्ता-हाल 

ईंटें  चुनी है   

प्यार को 

रुस्वा किया है 

जज़्बात का 

नक़ली सीमेंट लगाकर।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

शनिवार, 13 अक्तूबर 2018

तितली तूफ़ान

दिल में 

तूफ़ान रहा होगा 

आँखों में 

दरिया बहा होगा 

जब 

तितली तूफ़ान 

तबाही फैलाकर

ख़ून-पसीने की कमाई से बने 

नाज़ुक अरमानों से सजे  

आशियाने उजाड़ता 

आगे बढ़ा होगा 

बचपन और बुढ़ापा 

बेबसी के साये में 

क़ुदरत के क़हर से 

ख़ूब चिढ़ा होगा 

हमने अब 

सीख लिया है 

तूफ़ान से लड़ने का हुनर 

राहत में जुटते हैं जवान 

आबाद करते हैं गाँव-शहर  

ख़ौफ़नाक मंज़र 

पैदा करने वाले 

चक्रवात को 

क्यों दिया है 

एक नाज़ुक-सा नाम 

एक मासूम सवाल करता है 

तितली को क्यों करते हो बदनाम?

आदमी ने बोयी है फ़सल दुश्वारियों की 

तूफ़ान तुमने राह क्यों पकड़ी आसानियों की


© रवीन्द्र सिंह यादव

रविवार, 7 अक्तूबर 2018

काला झंडा



समाचार  आ  रहे  हैं-

"काले रंग से भयभीत हैं सत्ताधारी नेता" 

ब्रह्माण्ड की रचना में 

है सत्त्व, रज और तम 

गुणों की प्रधानता, 

सृष्टि के समस्त रंगों को 

सोख  लेने की 

 है काले रंग में क्षमता। 




प्रतिशोध  विरोध

द्वंद्व  विमुखता

नकारात्मक स्पंदन 

अपारदर्शिता  कलुषित विचार 

अब हैं काले रंग की पहचान,

बुरी नज़र से बचाने 

बचपन में माँ माथे पर 

लगा देती थी 

नन्हा काला निशान। 




सृष्टि में समाहित 

नाना प्रकृति की ऊष्मा 

अवशोषित करता सारी,

काले रंग में समाकर  

परावर्तन से रहती हारी। 




सबरंग मिलें 

तो बन जाय काला, 

रहता वहाँ काला अँधेरा   

पहुँच न पाया 

जहाँ श्वेताभ  उजाला।  




राम श्याम 

शिव शनि  

माँ काली, 

भाये सबको 

हुआ न कोई सवाली। 




श्याम-पटल पर 

सुलझाते अध्यापक 

जीवन के विकट सवाल,

जीवन में आती हैं ख़ुशियाँ  

काली रात के चंगुल से 

होती जब रौशनी बहाल।  



काला रंग ही 

साबित हुआ 

अब तक औरों से महान, 

मत कहना

न लिखना 

किसी  व्यक्ति को काला 

अन्तर्राष्ट्रीय क़ानून को लेना जान। 

  



काली करतूत 

काले कारनामे 

काला कारोबार 

काला धन

काला धब्बा  

काला मुँह 

कोयले की दलाली में हाथ काले  

बन गये

अब चर्चा के अंग, 

करके काले कर्म 

लोग करते 

समाज बदरंग। 





थर-थर काँप रहे हैं नेता

क्रोधित भीड़ में  

देखकर काला झंडा, 

काला झंडा जो लहराये  

पुलिस चलाती जमकर 

उसपर सरकारी  डंडा।  



सभा में आते लोगों की 

अब होती ख़ाना-तलाशी, 

काले रंग के 

अन्तःवसन

रुमाल

बेल्ट

या मोज़े भी   

हैं प्रतिबंधित 

सुनो अभिलाषी। 




शरारती तत्वों ने 

खोज लिया है  

काले झंडे का उपाय, 

नेताओं की सभा में 

नारा लिखकर 

काला  गुब्बारा 

अब देते हवा में 

ऊँचा उड़ाय। 

© रवीन्द्र सिंह यादव

मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

झाड़ू





बुज़ुर्गों ने समझाया था 

रात में झाड़ू मत लगाना 

घर से लक्ष्मी चली जायेगी  

सच कहा था 

बिजली से पहले का ज़माना

था ऐसा मानना 

अँधेरे-उजाले धुँधलके में   

कचरे के साथ 

क़ीमती चीज़ भी जायेगी 



आजकल 

लम्बे डंडे में बँधी झाड़ू 

विख्यात हो गयी है 

सेलिब्रिटी की नाज़ुक 

हथेलियों में जो गयी है


कई जाँचों से

गुज़रकर

निरापद होकर  

आगे बढ़ती है झाड़ू 

पकड़ते हैं इसे 

कैमरे के सामने 

नेता-अभिनेता जुगाड़ू 


नक़ली कचरा 

मँगवाया जाता है 

साफ़ जगह को 

गन्दा दिखाया जाता है 

कमाल के 

ढीठ सफ़ाईकर्मी हैं 

हमारे देश में 

वीवीआईपी के आने की 

पूर्व सूचना पर भी  

नियत स्थान को 

साहब के कहने पर 

साफ़ करके 

गन्दा दिखने हेतु 

प्री-ट्रीटेड कचरा फैलाते हैं


नाटकीयता से विरत 

जो हैं 

सुर्ख़ियों से परे  

सफ़ाई कार्य में 

अनवरत अनुरक्त

उन्हें

मेरा

सादर नमन

मिले उन्हें 

यथोचित सम्मान
   


बापू की स्मृति को 

चिरस्थायी बनाने हेतु 

 चश्मे पर 

लिख दिया है

"स्वच्छ भारत"

ज़रूरी है-  

दिमाग़ी  कचरा साफ़ हो 

साफ़ नियत-नीति की बात हो 

ख़ज़ाने की सफ़ाई में जुटे

लुटेरों पर लग़ाम हो 

सीवर-सफ़ाई का 

आधुनिक इंतज़ाम हो 

दिखेगा तब 

स्वच्छ भारत !

समृद्ध भारत !!

ज़रा सोचिये! 

अभी 

कैसा दिख रहा होगा..... 

अदृश्य बापू को 

अपने चश्मे से 

आज का भारत....???  

© रवीन्द्र सिंह यादव


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