यह ब्लॉग खोजें

विशिष्ट पोस्ट

शायद देखा नहीं उसने

चराग़-ए-आरज़ू   जलाये रखना,  उम्मीद आँधियों  में   बनाये रखना।  अब  क्या  डरना  हालात की तल्ख़ियों से, आ गया हम...