यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत स्वभाव

आज एक चित्र देखा मासूम फटेहाल भाई-बहन किसी आसन्न आशंका से डरे हुए हैं और बहन अपने भाई की गोद में उसके चीथड़े हुए वसन थामे अपना चेहरा छुपाये हुए है -


अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत  स्वभाव, 
देखती हैं नज़रें भाई-बहन के लगाव। 

हो सुरक्षा का एहसास  तो भाई का दामन ,
ढूंढ़ोगे ममता याद आएगा माई का दामन। 

जीवन हमारा है बना  दुःखों  की चक्की, 
पिसते रहेंगे सब  चाहे हों लकी-अनलकी। 

ज़माने से हम भी  हक़  हासिल करेंगे, 
आफ़त पे जीत बे-शक  हासिल करेंगे। 

है प्रभु का शुक्राना  आज सलामत हैं हम, 
किस  लमहे  की  आख़िर ज़मानत हैं हम ?
#रवीन्द्र सिंह यादव 

विशिष्ट पोस्ट

शातिर पड़ोसी और हम ....

विस्तारवादी सोच का  एक देश  हमारा पड़ोसी है  उसके यहाँ चलती तानाशाही   कहते हैं साम्यवाद, हमारे यहाँ  लोकतांत्र...