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रविवार, 6 अगस्त 2017

मित्रता -दिवस


दोस्त ! 
आपकी ज़िन्दगी 
ख़ुशियों  से 
रहे गुलज़ार 
राहें रौशन हों  सदा 
घर-आँगन रहे बहार। 


मनहर पयाम 
लाती  रहे  पवन 
बग़िया में 
क़ायम रहे 
फूल और 
माली-सी लगन
सुदूर तक 
ग़मों का 
साया न हो 
साँसें हैं अपनी 
तब तक 
जुड़ें रहें तार। 



पिछला ज़माना 
याद है हमको 
जब उलझे थे 
तूफ़ानों में 
लाये थे हम 
खे कर कश्ती 
है कशिश कितनी 
अपने अफ़्सानों में  
आते हैं याद 
पल वो बार-बार। 


दोस्ती के लिए 
बाज़ारवाद ने 
तय किया 
एक दिन 
हम करते हैं 
इक़रार 
बाबरा मन 
करता है याद 
सुबह-शाम 
हर घड़ी-पलछिन 
आबाद रहें 
रिश्तों के आशियाँ 
बहती रहे 
भावों की 
कल कल धार। 

#रवीन्द्र सिंह यादव 

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