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गुरुवार, 20 जुलाई 2017

ख़त


ख़त  मिला
आपके  रुख़्सत  होने के बाद,
कांधा गया
सर  रखूँ  कहाँ  रोने  के  बाद।


ख़्वाब पहलू से
उठकर चल दिए,
जागती रहेंगी
तमन्नाएँ रातभर सोने के बाद।


नयन के पर्दे से
बाहर आएगी  ख़ामोशी,
पिघलेंगे जज़्बात
अश्क़ों से रुख़सार धोने के बाद।


वीरान राहें
चुपचाप सो गयीं हैं ,
हवाऐं उड़ा ले गयीं वो बीज
खुश थे हम जिन्हें बोने के बाद।


आपकी तस्वीर
बादल में बन रही है ,
तड़प बिजली सी
बढ़ती जाएगी हमसफ़र खोने के बाद।

@रवीन्द्र सिंह यादव


सूचना - यह रचना "मेरे शब्द -स्वर" (You Tube.com )  चैनल पर सस्वर उपलब्ध है।  


शब्दार्थ / Word Meanings 

ख़त = पत्र ,चिट्ठी ,Letter 


रुख़्सत  =बिछड़ना,चले जाना ,To Leave 



कांधा =कंधा, Shoulder 



सर =मस्तक, Head 



ख़्वाब =स्वप्न,सपना, Dream(s)  



पहलू =पार्श्व ,बग़ल ,Side ,Aspect 



तमन्नाऐं = इच्छाएं ,अरमान ,Desires 



नयन =आँख ,चक्षु ,नेत्र ,Eye 



पर्दे /पर्दा =चिलमन ,आड़,Curtain(s) 



ख़ामोशी =नीरवता,सन्नाटा, Silence 



जज़्बात = भाव ,मनोभाव, Feelings ,Emotions 



अश्क़ों /अश्क़ =आँसुओं /आँसू ,Tear(s)



रुख़सार =गाल ,Cheek(s)  



वीरान =सुनसान ,Deserted ,Lonely 



हमसफ़र = हमराही ,साथी ,Companion, A Fellow Traveller 


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