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रविवार, 7 मई 2017

सत्ता




जनतंत्र    में     अब 
कोई     राजा    नहीं
कोई   मसीहा   नहीं
कोई  महाराजा  नहीं
बताने  आ  रहा  हूँ  मैं,
सुख-चैन  से  सो  रही  सत्ता
               जगाने   आ   रहा   हूँ    मैं ।  (1 )


तेरे   दरबार  में  इंसान 
कुचला     पड़ा          है ,
तेरे  रहम-ओ -करम  पर
 क़ानून  बे-बस  खड़ा  है ,
तेरे        वैभव           की
चमचमाती  चौखट  की  चूलें
हिलाने    आ   रहा   हूँ      मैं ।
सुख -चैन  से  सो  रही   सत्ता
         जगाने      आ    रहा   हूँ    मैं ।  (2 )


संवेदना   को   रौंदकर
शोर   के     ज़ोर       को  
आगे  बढ़ाती  जा  रही  है   तू ,
भीड़   को   उन्माद    का  
रस   पिलाती  जा   रही  है   तू ,
तेरी    औक़ात-ओ -शान     को     
दर्पण  दिखाने आ रहा  हूँ    मैं।
सुख -चैन    से   सो  रही  सत्ता
         जगाने     आ    रहा    हूँ      मैं ।   (3 )



देखे  हैं   अब   तक   मैंने 
तेरे   यार - दोस्त      सभी ,
इनमें   होते  नहीं   शामिल
दुखियारा / दुखियारी  कभी ,
जाँघ     कट     जाने      पर 
कमर   से  लकड़ी  बांधकर
हल जोतते  किसान  की  पीड़ा
सुनाने     आ    रहा     हूँ      मैं ।
सुख -चैन   से   सो   रही   सत्ता
      जगाने    आ     रहा    हूँ     मैं ।    (4 )


मेरा    हक़     मारकर 
छकों   को  दे  रही  है   तू
नाव / पतवार       हमारी 
      बैठाकर  किसे  खे  रही  है   तू ......?
भूख  से   व्याकुल   बच्चों   की 
तड़प    न     सह    पाने      पर 
एक     माँ     के      आग      में 
जल  जाने  की   जलन / तपन
महसूस कराने आ   रहा  हूँ   मैं ।
सुख -चैन   से    सो    रही  सत्ता
     जगाने      आ     रहा      हूँ    मैं ।   (5 )


बेकारी  के दौर में  दर-दर  भटकते
मायूस      हैं     युवामन,
नैराश्य   के  ख़ंजर    ने 
घायल   कर      दिए  यौवन ,
अभावों        में       मचलते 
स्वाभावों     का     गणित
पढ़ाने    आ     रहा   हूँ    मैं ।
सुख -चैन  से  सो  रही सत्ता
              जगाने    आ   रहा    हूँ    मैं ।  (6)



दरिंदों     की    हवस      ने
जीवन  तबाह  कर  डाले  कई,
स्त्री - जीवन      में       क्यों 
रोज़    चुभते   हैं   भाले   कई,
रोज़  मर  मरकर  जीने  की  टीस  का अहसास
सुनाने  आ   रहा    हूँ    मैं ।
सुख -चैन  से  सो रही सत्ता
       जगाने    आ    रहा   हूँ  मैं ।   (7)


राज  करने  का लायसेंस  
तेरा  क़ाएम   रहे   तो. .....         
लड़ाती       है          हमें 
आपस   में  बैर   रखने    को, 
कहती  है  होकर  ज़ालिम  तू
 मज़लूम  पर पैर  रखने   को ,
तेरी      मर    चुकी      ग़ैरत 
ज़िंदा  कराने  आ  रहा हूँ  मैं ।
सुख -चैन    से  सो रही सत्ता
       जगाने   आ    रहा    हूँ    मैं ।   (8)


तेरे   आत्ममुग्धी    फ़ैसलों    से 
जनता  तकलीफ़   में  पड़ती  जा  रही   है,
किसी      का     घर     भर    दिया     तूने
ग़रीबों  से  रोज़ी   बिछड़ती  जा   रही  है,
तेरी      बदमाशियों        का        चिट्ठा
लटकाने ललाट  पर  तेरे  आ रहा  हूँ  मैं ।
सुख -चैन     से      सो       रही        सत्ता
         जगाने        आ         रहा        हूँ         मैं ।   (9)


झौंक        दिया       सारा       जीवन 
औरों     के         सुख    की  चाह   में ,
राष्ट्र       का        निर्माण         करने 
गढ़          गया        हूँ       थाह       में ,
श्रेय  लेने  की बे-हयाई  तुझे मुबारक़  
स्वराज     के     मर्म     का    परचम
लहराने       आ       रहा        हूँ     मैं।
सुख -चैन     से     सो     रही     सत्ता
           जगाने      आ        रहा       हूँ       मैं ।    (10)
@रवीन्द्र  सिंह यादव

Word  Meaning 
जनतंत्र   = लोकतंत्र ,Democracy
 मसीहा  = दुःख - दर्द हरने वाला ,Healer
रहम-ओ -करम = मेहरबानी ,Grace & favour, MERCY & KINDNESS 
बे-बस = शक्तिहीन ,Powerless
वैभव=शान -शौकत ,भव्यता ,Wealth ,Grandeur
चौखट = किवाड़ों  की चौखट , Door frame
चूलें = जोड़ ,Dovetail ,Joints
उन्माद =ज़ुनून ,सनक ,पागलपन ,Hysteria ,Madness ,Mania
औक़ात-ओ -शान = क्षमता और गर्व ,Status /Capacity &Pride
जांघ = जंघा ,Thigh
छकों = छके हुए ,मन भर कर खाये हुए ,तृप्त ,संतृप्त ,Fulfillment ,Saturated ,wealthy persons
ख़ंजर= कटार , DAGGER 
खे = नाव खेने (Moving Boat ) की क्रिया
अभाव = कमी , अनुपलब्धता,Scarcity ,Unavailability
ज़ालिम = दुष्ट ,cruel
मज़लूम = घायल /पीड़ित , Injure ,Oppressed
आत्ममुग्धी = ख़ुद को प्रसन्न करने वाले ,Self pleasent
महरूम = वंचित ,Deprived ,Prohibited 
ललाट = ,Forehead
थाह =गहराई ,Depth
बे-हयाई   = बेशर्मी   ,निर्लज्जता ,धृष्टता , Being Shameless
परचम =ध्वज ,झंडा ,Flag

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