यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

दास्तां



तेरी  हर शय

तेरी  हर  शर्त

है   क़बूल  मुझे ,

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का उसूल  मुझे।  ......... (1 )




कोई   गुज़रा

कोई  मुक़रा

कोई  सिमटा

अपने - अपने  दायरों में ,

मैं  भी एक गवाह  हूँ  सफ़र  का

यों   ही  न  भूल  मुझे।

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का  उसूल  मुझे।  ......... (2 )




दिल  में

उतर  जाता  है  कोई

तितली  सी  ज़हानत    लिए,

पंख  जाते   हैं  उलझ

काँटों  में

कहता  है   कोई

बेमुरब्बत   फूल   मुझे।

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का  उसूल  मुझे।  ......... (3 )




मंज़िल  की  ओर

कारवाँ  बढ़ने  का

सिलसिला  चलता  रहा ,

हासिल  हो  न  हो

मक़सद

इंतज़ार  का   सिला

करना है वसूल मुझे।

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का  उसूल  मुझे।  ......... (4  )






ले    डूबेगा  एक  दिन

क़तरे    को

दरिया   बनने   का शौक़ (?)

दामन  से  लिपटकर

एक   दिन  सुनाएगा

दास्तां  अपनी शूल मुझे।

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का  उसूल  मुझे।  ......... (5 )




वक़्त  फिसला  है  

रेत     की   तरह 

"रवीन्द्र "  के हाथों  से,

सज़दे  में झुक  गया  हूँ  

समझ   न 

पुल  से   गुज़रने   का  महसूल  मुझे। 

ज़िन्दगी  तू

अब  सिखा  दे

जीने  का  उसूल  मुझे।  ......... (6  )

@रवीन्द्र  सिंह  यादव


मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

ऐ हवा चल पहुँचा दे मेरी आवाज़ वहाँ


ताजमहल  को  देखते आगरा  क़िले  में क़ैद  शाहजहां  ने शायद  ये  भी  सोचा  होगा.........  

                   ( मुग़ल  बादशाह  औरंगज़ेब  अपनी  क्रूरता  के लिए  कुख़्यात  हुआ।  बड़े  भाई   दारा  शिकोह  सहित  अपने  तीनों  भाइयों ( दो अन्य  शाह शुज़ा  व  मुराद बख़्श )  को    मौत  के घाट  उतार  कर वृद्ध  पिता  शहंशाह  शाहजहां  को  विलासता  पर जनता  का  धन   ख़र्चने ( ताजमहल का निर्माण सन 1632 में प्रारम्भ  हुआ जोकि  अगले 20  वर्षों  में पूरा हुआ )  के  आरोप में  सन  1658 में  आगरा  के लाल  क़िले ( मुग़ल सम्राट  अक़बर  द्वारा निर्मित 8  साल निर्माण कार्य  चलने के बाद सन  1573  में बनकर तैयार हुआ ) में क़ैद  कर  अति मानव  औरंगज़ेब  गद्दी  पर बैठा।  शाहजहां  द्वारा  कराये  गए  ताजमहल  के  निर्माण  का  औरंगज़ेब  ने तीखा  विरोध  किया था।                  

             हालांकि मुग़ल बादशाह  औरंगज़ेब  के बारे  में उल्लेख  मिलते  हैं कि  वह  अपने  निजी ख़र्च   के लिए  टोपियाँ  सिलने   और  क़ुरान  की नक़ल ( कॉपी )  तैयार  करने  से हुई  कमाई  का उपयोग  किया करता था।

                आगरा के लाल  क़िले  से  दक्षिण-पूर्व  दिशा  में( लगभग ढाई किमी  दूरी )  यमुना  के किनारे  ताजमहल  स्पष्ट  दिखाई  देता  है।  शहंशाह  शाहजहां  ने अपनी  मृत्यु ( सन  1666 , आयु  74  वर्ष ) से  पूर्व  नज़रबंदी  के लगभग  साढ़े  सात  साल  कैसे तन्हा  रहकर  गुज़ारे  होंगे  जिसने  30 साल  ख़ुद  शहंशाह  का ताज  पहनकर  वक़्त  की  आती-जाती  रौनकों  को   जिया  हो.................................ज़ारी .....





              इंतक़ाल  के बाद  शाहजहां  को भी ताजमहल में  उनकी प्यारी बेग़म  मुमताज़ महल ( जोकि  सन  1631  में ख़ुदा  को प्यारी  हो गयी थीं ) की क़ब्र  के बग़ल   में दफ़नाया  गया।
             पेश   है   एक   रचना  जिसे  मैं  अपने  कल्पनालोक  में  शाहजहां  के  जज़्बात   कहूँगा। त्रुटियों  के  लिए  क़लम  के  सरताज, कला  के 
क़द्र-दान   क्षमा  करें , उपयुक्त  सुझाव  दें .... )



ऐ  हवा  चल 


पहुँचा    दे     मेरी    आवाज़  वहाँ,


मुंतज़िर   है   कोई


सुनने  को   मेरे   अल्फ़ाज़  वहाँ।   (1)




दूरियां   बन गयीं  


ज़माने   ने  ढाया   है  क़हर ,


मैं   यहाँ   क़ैद   क़िले   में  


दफ़न      मेरी      मुमताज़   वहाँ । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने   को  मेरे  अल्फ़ाज़   वहाँ ।    (2)




गुज़रेंगे   लम्हात -ए -ज़िन्दगी  


अपनी   रफ़्तार   लिए ,


तराने  गुनगुनायेगी  ज़ुबां  


बजेंगे  धड़कनों    के  साज़   वहाँ । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने   को  मेरे  अल्फ़ाज़   वहाँ ।    (3)




लोग  ढूँढ़ेंगे   दर्द-ओ-सुकूं 

  
मोहब्बत  की इस  निशानी  में,


देखने   आएगी  दुनिया  


साहिल -ए -जमुना खड़ा  है  ताज  वहां । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने      को      मेरे     अल्फ़ाज़   वहाँ ।   (4)




वो   दिन   भी  आएगा  


हज़ारों दिल मलाल से  भर जायेंगे,


सहेजेगी   हुक़ूमत    मेरे   जज़्बात  


खड़ा           होगा       समाज   वहाँ।    


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने    को   मेरे   अल्फ़ाज़   वहाँ ।    (5)




मेरे  जज़्बे   को  सलाम  आयेंगे  


सराहेंगे   क़द्र-दान    शिल्पकारों  को,


प्यार   नफ़रत   से  बड़ा  होता  है 


कहेगा अफ़साना उनसे जो नहीं आज  वहाँ ।  


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने         को        मेरे      अल्फ़ाज़   वहाँ ।    (6)




लिख  देंगे  एक  प्यारी  सी  नज़्म 


देखकर  पुरनूर  मंज़र ,


जब    भी   आएंगे....तड़पेंगे 


क़लम       के       सरताज    वहाँ । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने    को   मेरे   अल्फ़ाज़   वहाँ ।   (7)




नज़र  भी  बेवफ़ा  हो  गयी  है  


आलम-ए -तन्हाई   में ,


नए   चश्म -ओ -चराग़    होंगे 


ज़माना          करेगा      नाज़   वहाँ 

     
मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने    को   मेरे   अल्फ़ाज़   वहाँ ।   (8)




 जाने -अनजाने  गुनाहों  की  


सज़ा  मुझे  देना  मेरे  मौला ,


तब  इश्क़    की मासूमियत   के 


खुलेंगे     धीरे-धीरे    राज़    वहाँ । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने    को   मेरे   अल्फ़ाज़   वहाँ ।    ( 9 ) 




पास   है  जो   ख़ज़ाना -ए -रौनक 


लगा   ले   दिल  से  अपने  ऐ "रवीन्द्र ",


यादों   के  पहलू   में आकर  


लोग  परखेंगे  वक़्त  का  मिज़ाज  वहाँ । 


मुंतज़िर  है   कोई  


सुनने       को     मेरे      अल्फ़ाज़   वहाँ । 

ऐ  हवा  चल 


पहुँचा    दे    मेरी    आवाज़   वहाँ,


मुंतज़िर   है   कोई


                         सुनने  को   मेरे   अल्फ़ाज़   वहाँ ।    (10 )                                 

 @रवीन्द्र   सिंह  यादव 


शब्दार्थ ( Word -Meanings )

मुंतज़िर = किसी के इंतज़ार में / Waiting for somebody 


अल्फ़ाज़ =  शब्द (लफ़्ज़ का बहुवचन) / Words 


क़हर =विपत्ति , Havoc 


लम्हात - ए -ज़िन्दगी  = ज़िन्दगी  के  लम्हे , क्षण  /                                Moments of  life 


तराने = सुमधुर , सस्वर  गीत / A  kind  of  songs                ,symphony 


ज़ुबां = जीभ  / Tongue 


साज़ = वाद्य-यंत्र  / Apparatus  for  music 


दर्द -ओ सुकूं  =  पीड़ा  और  चैन  / pain  & relief 


साहिल-ए -जमुना  = यमुना नदी का किनारा / Bank  of                        river  Yamuna 


ताज = मुकुट  / Crown 


मलाल  = दुःख / Grief 


हुक़ूमत  = सत्ता ,शासन / Governance 


जज़्बात  = भाव  / Emotions 


जज़्बे = जज़्बा , भाव / Emotion 


क़द्र-दान = गुण , कला  आदि  परखने  वाला / One who                       appreciate 


शिल्पकार = कारीग़र , शिल्पी / Architect,


अफ़साना =क़िस्सा  ,कहानी / Tale,fiction , legend 


नज़्म = कविता ,छंद ,गीत ,ग़ज़ल / Poetry ,verse,


पुरनूर =बेहद  चमकदार / Filled with  light , very  bright 


मंज़र = दृश्य / Scene ,


क़लम = लेखनी / Pen 


क़लम   के  सरताज  = शब्दों  के  जादूगर ( रचनाकार,शायर,                        कवि ,लेखक  आदि ) शब्द -शिरोमणि , अग्रगण्य /

                       Leader ,chief ,Poet ,Shayar 


आलम-ए -तन्हाई  =  अकेलेपन  की हालत , दशा , Stage  of                      loneliness,  


चश्म -ओ -चिराग़ = सबसे  अधिक  प्रिय , Loved  one ,                      Light  of   eyes.  


नाज़ = गौरव / Pride 


इश्क़ = प्यार  / LOVE ,


राज़ = रहस्य / Secret ,


मासूमियत = निर्विकार  भाव की  अवस्था  / Innocence,


ख़ज़ाना-ए-रौनक = ज़िन्दगी के खूबसूरत व उजले पलों का भंडार/                                                                         TRESSURE OF GOODNESS ,                       GLORIOUS DAYS ,

                 Treasure  of good  time 


पहलू =पक्ष ,सुखदायी  आश्रय / Side , Shade ,


मिज़ाज =    स्वभाव ,Temperament

विशिष्ट पोस्ट

धूर्त फ़िल्मकार

धूर्त फ़िल्मकार   संवेदनशील बिषयों पर  फ़िल्म बनाते हैं  जनता की जेब से  पैसा निकालते हैं  भोली-भाली जनता को  ठगने के लिए  किर...