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बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

वागीश्वरी जयंती



जय   हो   वीणावादिनी

जय   हो   ज्ञानदायिनी

विद्या ,बुद्धि ,ज्ञान की देवी

करो   मेधा  प्रखर  वाग्देवी।



माघ   मास  शुक्लपक्ष  पंचमी

वागीश्वरी जयंती

पूजा-आराधना  शाश्वत  ज्ञान  हेतु

शीश  नमन्ति !



हे   माँ !

उन   मस्तिष्क   का  विवेक

जाग्रत   रखना

जिनकी   अँगुलियों   को

भोले  जनमानस   ने

परमाणु - बटन   दबाने  का  अधिकार  सौंप  दिया  है ,

उन  स्वार्थ   की  परतों  को  उधेड़   देना

जिन्होंने   मानवता  की  पीठ  में  ख़ंजर   घौंप  दिया  है।

उन  मनीषियों  की  प्रतिभा  प्रचंड  प्रखर  करना

जो  स्वयं   को   जलाकर

रोशनी     के      हेतु   हैं ,

कल   और  आज   के

धवल -   सबल   सेतु   हैं।

उन  दीन -दुखी , निबल, जर्जर   को  संबल  देना

जो       मूल्यों     की     धरोहर     सहेजे  हैं,

वक़्त   के   ज़ुल्म-ओ-सितम    सहकर

निष्ठा   को    आज   भी   लगाए   कलेजे    हैं।

उन   दिमाग़ों    में  स्त्री-गरिमा   की  ज्योति  प्रदीप्त  करना

जो  भोग-उपभोग   का    मानस  लिए  भटकते  हैं,

असहाय   समाज   की  आँख   में

यदाकदा     नहीं       अब       रोज़        खटकते   हैं।



हे  माँ !

भटके  हुए   जीव - जगत   को

सुरमयी  गीत   सुनाकर  उजियारा   पथ   दिखा   देना ,

जीवन- संगीत   का

दिव्य               बसंती -राग                   सिखा   देना।

                                                @ रवीन्द्र  सिंह यादव