यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 15 नवंबर 2016

बहुरुपिया

बहुरुपिया आया.............बहुरुपिया आया..........

शोर  सुनकर  कौतूहलवश

बच्चे, बूढ़े, अधेड़, जवान  सभी

देखने  आये  लपककर

पहले  वह  धवल  वस्त्र  धारण  कर

योगी  के  वेश  में  आया

सड़क  के  दोनों  ओर

बनी दुकानों, छतों  और  बालकनी  से  देख  रहे  लोग

सत्कार भाव से

सराह  रहे  थे  निहार  रहे  थे  उसका  वियोग

अगले  दिन  हाथ  में  लाठी  लिये

शीटी  बजाता  हुआ  चौकीदार  बनकर  आ  गया

बच्चों  को  खूब  भा  गया

कभी  भगवान  बनकर  आया

कभी  कसाई  बनकर  आया

एक  दिन  मजनूं   बनकर  आ  गया

फिर  सैनिक  बनकर  आया

अगले  दिन  डॉक्टर  का  आला  गले  में  डालकर  आ  गया

सात  दिन  जनता  का  मनोरंजन  किया

आठवें  दिन   नाटकीयता  के बदले  आशीर्वाद  मांगने आ गया

लोगों ने  यथाशक्ति  उसे  नोट  दिये

ज़हन  में  बहुरुपिया  के  नकली  रूप  नोट  किये.......

बच्चों  को  बड़ों  ने  सीख  दी

यह  शख़्श  केवल  मनोरंजन  के  लिये  है

इतने  रूप  अनापेक्षित  हैं  एक   जीवन  के  लिये.................






विशिष्ट पोस्ट

मैं भारत का किसान

मैं  भारत  की शान,  कहते मुझे किसान।  पढ़ना -लिखना सब चाहें  अफ़सर बनना सब चाहें  मैं  देखूँ   खेत-खलिहान।   मैं  भारत  की शान  कहते...