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शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

नई सुबह



इठलाती  शाम  चली  है

 गुज़रने   के   लिये

परिंदे  तैयार  हैं  फिर

  सिंदूरी धूप में निखरने के लिए ।



आदमी  लगा  है  रात-दिन

 कुछ  न  कुछ  करने  के  लिये

नन्हीं  चिड़िया  सोने चली है 

सपनों  में  बिचरने  के  लिये।



नियति-चक्र  नहीं  बना  है

पलछिन  भी  ठहरने  के लिये

दुनिया  ने  इंतज़ाम  किये  हैं

 सन्नाटा  पसरने  के  लिये।



सुमन  से  आज़ाद  है  सुगंध

हवाओं  में  बिखरने  के लिये

हम आज  बेक़रार  हैं  क्यों

भाव  रिश्तों  का परखने  के लिये।



नई  सुबह  का  इंतज़ार  है

जब  कुछ  न  हो  अखरने  के  लिये

प्यास  बुझ  जायेगी  अब

आई  है  बदली ज़मीं पर उतरने  के  लिये।

# रवीन्द्र  सिंह यादव

शब्दों के अर्थ / पर्यायवाची / Word Meanings

इठलाती= चंचल  अदाओं के साथ मटकती या इतराती हुई/ Flirtatiously
परिंदे   = पंछी ,पक्षी, खग / Birds
बिखरने  =  फैल  जाना , अलग-अलग हो जाना / Disperse
नन्हीं = छोटी,लघु / Small
विचरने  = घूमने-फिरने , विचरण   करने / To Walk
नियति-चक्र= प्रकृति  का चक्र , समय-चक्र ,काल-चक्र / Nature's Cycle
पलछिन =समय का बहुत छोटा हिस्सा ,पल,क्षण /  Moment
पसरने   = फैलने , विस्तार करने / To Spread
सुमन= फूल ,पुष्प / Flower
सुगंध= अच्छी  गंध ,ख़ुशबू  , मनभावन महक / Fragrance/ Flavour
बेक़रार = बेचैन, व्याकुल , तड़प से भरा हुआ / Restless
अखरने = बुरा लगने , चुभने ,कचोटने / To Pinch
बदली =  बादल  का छोटा टुकड़ा / Small Cloud/ 

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