यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 17 जनवरी 2018

चाहा था एक दिन ...

माँगी थीं 
जब बिजलियाँ,  
उमड़कर 
काली घटाएँ आ गयीं। 

देखे क्या जन्नत के 
दिलकश ख़्वाब,
सज-धजकर  
गर्दिश की बारातें आ गयीं।  

चाही हर शय 
हसीं जब  भी, 
बेरहम हो 
आड़े 
वक़्त की चालें आ गयीं। 

इंतज़ार था 
कि आँखों से बात हो, 
तिनकों के साथ 
ज़ालिम हवाऐं आ गयीं। 

दर्द-ए-जिगर से 
राहत माँगी थी एक दिन 
नश्तरों की ज़ख़्म पर 
बौछारें आ गयीं।   

चाहा था एक दिन 
पीना ठंडा पानी ,
लेकर वो तश्तरी-ए-अश्क़ में 
सुनामी लहरें आ गयीं।  

# रवीन्द्र सिंह यादव 

रविवार, 14 जनवरी 2018

कोई रहगुज़र तो होगी ज़रूर ....


चलते-चलते 
आज यकायक 
दिल में 
धक्क-सा हुआ 
शायद आज फिर 
बज़्म में आपकी 
बयां मेरा अफ़साना हुआ

फ़क़त मेरे दिल में हों 
बेताबियाँ 
ऐसा भी तो नहीं 
ख़्वाब में आप भी 
कूचा-कूचा 
तलाशते हो मुझे 

राहत की बात है 
हमने अब तक 
कुछ तो बचाये रखा है 
चिलमन में 
लेकर ख़्याल मेरा 
न झाँकना आईने में 
शैदा ख़ुद पे होने से 
ख़ुद को 
कैसे रोक पाओगे .....?

मुतमइन बैठा हूँ 
मैं तो घने पेड़ की छाँव में 
डूबने को जब सूरज हो 
सुनसान राहों पर 
ख़ुद को बचाकर चलना
कोई रहगुज़र-ए-दिल   
तो होगी ज़रूर 
जो ले आएगी मुझ तक.........?  
#रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ / WORD  MEANINGS 

1.  यकायक = अचानक / All of a sudden 
2.  बज़्म= गोष्ठी ,महफ़िल / Meeting , Feast 
3.   फ़क़त= सिर्फ़ / Only 
4.  कूचा= गली / Lane , Narrow Street 
5.  चिलमन= पर्दा ,Curtain 
6.  शैदा= मुग्ध,आसक्त  / Enamored  
7.  मुतमइन = संतुष्ट ,शांतचित्त, Satisfied, Secure,Quiet 
8.  रहगुज़र-ए-दिल =  दिल तक पहुँचने वाली राह / Path Of  Heart 
     


सोमवार, 8 जनवरी 2018

हवा गर्म हो रही है....


कैसा दौर आया है
आजकल
जिधर देखो उधर
हवा गर्म हो रही है
आया था चमन में
सुकून की साँस लेने
वो देखो शाख़-ए-अमन पर
फ़ाख़्ता बिलख-बिलखकर रो रही है।

दोस्ती का हाथ
बढ़ाया मैंने फूलों की जानिब
नज़र झुकाकर फेर लिया मुँह
शायद नहीं है वक़्त मुनासिब
सितम दम्भ और दरिंदगी के 
सर चढ़कर बोल रहे हैं
पगडंडियों की रेत
अंगारे सर्दियों में हो रही है।

ये ज़र्द सितारे
जो फ़लक से आ गिरे हैं 
ज़ख़्मी ज़मीं पर 
आओ इनमें रौशनी की
शाश्वत किरण ढूँढ़ते हैं
इंसानियत के सूखते
समुंदर में
देखो फिर बरसात हो रही है ...... !!!
#रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ / Word Meanings -
1. दौर = समय ,युग ,परिधि  / Era ,Age ,Circumference 
2. चमन = फूलों की बग़िया / Flower Garden 
3. सुकून = शान्ति ,चैन ,आराम, निस्तब्धता / Peace ,Rest, Feel Good,                   Tranquility  
4. साँस  = श्वांस, / Breath 
5. शाख़-ए-अमन= शान्ति की डाली / ऐसी शाखा जिस पर शान्ति हो,                               जीवन रूपी  वृक्ष में शान्ति एक शाखा है / Bough of peace
6. फ़ाख़्ता= शांति का प्रतीक कबूतर / कबूतरी  / Dove 
7. जानिब= ओर, तरफ़, सू  / Towards, Side, From, Direction 
8. वक़्त= समय / Time 
9. मुनासिब = उपयुक्त ,सही / Suitable , Proper 
10. सितम= अत्याचार, ज़ुल्म, अन्याय / Injustice ,Outrage ,Oppression
11. दम्भ= अहंकार ,दर्प ,घमंड ,मद / Ego 
12. दरिंदगी= ख़ौफ़नाक आचरण ,वहशीपन ,पाशविक आचरण/               Barbarism,Bestiality 
13. सर चढ़कर बोलना = जिसे किसी प्रकार से छिपाया न जा सके / 
Tough to hide 
14. पगडंडियाँ = पैदल चलने के लिए सँकरे रास्ते / 
Foot Paths , By -Ways 
15. रेत= बालू / Sand 
16. अंगारे= शोले / Heated Coals 
17. ज़र्द = पीला / Yellow, Pale 
18. फ़लक = आकाश ,नभ ,आसमान / Sky ,Heaven 
19. ज़ख़्मी = घायल ,चोटिल / Wounded, Hurt 
20. ज़मीं = धरती , धरा ,पृथ्वी / Earth, Land 
21. शाश्वत= न मिटने वाला , जो सदा से चला आ रहा हो / Eternal,                             Ageless 
22. इंसानियत= मानवता / Humanity 

23. समुंदर = समुद्र, सागर  / Sea 

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

संविधान पर दादा और पोते के बीच संवाद ....


गाँव की चौपाल पर अलाव 

सामयिक चर्चा का फैलाव 

बिषयों का तीव्र बहाव 

मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। 

बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद -

दद्दू : *****मुहल्ले से 

       रमुआ ***** को बुला  लइओ , 

       कब से नाली बंद है...   

पोता : आप मुहल्ले से पहले ,

          रमुआ  के  बाद....  

         जो शब्द जोड़कर बोल रहे हैं 

         अब ग़ैर-क़ानूनी  हैं 

         असंवैधानिक  हैं....  

दद्दू : ज़्यादा पढ़ -लिख लिए हो !

        रामू (रमुआ) का आगमन 

दद्दू :  (जातिसूचक  गाली देते हुए )

          क्यों रे *****रमुआ !

          तेरी इतनी औक़ात कि अब बुलावा भेजना पड़े !

पोता : दद्दू  आप क़ानून तोड़ रहे हैं .... 

          रमुआ  की शिकायत पर 

          संविधान आप दोनों के साथ इंसाफ़ कर सकता है.... 

दद्दू :   जीना हराम कर दिया है तेरे संविधान ने ..... 


पोता : हाँ, आप जैसों की चिढ़ को समझा जा सकता है।  
          समानता और बंधुत्व का विचार 
          आत्मसात कर लेने में बुराई क्या है। 
          हमारा संविधान ज़बानी जमा ख़र्च नहीं है 
          बल्कि लचीला और  लिखित है। 

दद्दू : हो गया तेरा लेक्चर !

पोता: एक सवाल और ......

          (दद्दू  से दूरी बनाते हुए

         गंदगी का आयोजन करने वाला बड़ा होता है 
         या उसे साफ़ करने वाला......?????
         (रामू नाली की सफ़ाई में जुट गया 
        और दद्दू  पोते के पीछे छड़ी लेकर दौड़े ........ )

# रवीन्द्र  सिंह यादव 

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

इश्क़ की दुनिया में ....


इश्क़ की दुनिया में

ढलते-ढलते रुक जाती है रात

हुक़ूमत दिल पर करते हैं जज़्बात

ज़ुल्फ़ के साये में होती  है शाम

साहब-ए-यार  के  कूचे से गुज़रे  तो हुए बदनाम

साथ निभाने का पयाम

वफ़ा का हसीं पैग़ाम

आँख हो जाती है जुबां हाल-ए-दिल सुनाने को

क़ुर्बान होती है शमा जलकर रौशनी फैलाने को

चराग़ जलते हैं आंधी में 

आग लग जाती है पानी में

आये महबूब तो आती है बहार

उसकी महक से महकते हैं घर-बार

सितारे उतर आते हैं ज़मीं पर

होते हैं ज़ुल्म-ओ-सितम सर-आँखों पर   

गुमां-ए-फंतासी में डूबा दिल

कहता है बहककर -

थम जा ऐ वक़्त !

बहुत प्यासा है दिल मोहब्बत का

अफ़सोस ! निष्ठुर है वक़्त

मारकर ठोकर इस याचना को

आगे बढ़ता रहता है

हमेशा की तरह..... 

#रवीन्द्र  सिंह यादव

विशिष्ट पोस्ट

चाहा था एक दिन ...

माँगी थीं  जब बिजलियाँ,   उमड़कर  काली घटाएँ आ गयीं।  देखे क्या जन्नत के  दिलकश ख़्वाब, सज-धजकर   गर्दिश की बारातें आ गयीं। ...