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शनिवार, 21 अक्तूबर 2017

भूख से मौत

संतोषी भात-भात कहते-कहते भूख से मर गयी,
हमारी शर्म-ओ-हया भी तो अब बेमौत मर गयी।

डिप्टी कमिश्नर ने जांच के बाद कहा -
वह तो मलेरिया से मर गयी,
हम पूछते हैं -
सरकार की ग़ैरत  कैसे  मर गयी?
मलेरिया के मरीज़ को भी भूख लगती है 
मलेरिया से मरना मच्छर के माथे कलंक ?
कैसा मशीनी / डिजिटल समाज बना रहे हैं हम ?  
भूख से मरना ही नहीं है सरकार के माथे कलंक!

भुखमरी में भारत को नया स्थान मिला है ,
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में
119 देशों में  100 वां  स्थान मिला है,
गत  वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 
3 अंकों का नकारात्मक बोनस मिला है। 
क्या हमें संतोष होना चाहिए ?
कि हमसे भी  बुरा स्थान 19 और देशों को मिला है!

सरकार की ज़िद है -
अब आधार को राशन कार्ड से लिंक कराना ज़रूरी है,
सुप्रीम कोर्ट में आधार पर सुनवाई अभी अधूरी है। 
ग़रीब जनता असमंजस में है कि
सरकार की सुने या सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करे ?
खाद्य सुरक्षा क़ानून है फिर भी भूख से तड़प-तड़पकर मरे ?
ग़रीब के मरने पर ही जागती है सरकार,
अमीर के तो इशारों पर भागती है सरकार।

#रवीन्द्र सिंह यादव

डिप्टी कमिश्नर = ज़िला सिमडेगा (झारखंड) 

मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

धन तेरस

कार्तिक मास कृष्णपक्ष त्रियोदशी 
धन तेरस शुभता लायी, 
समुद्र-मंथन में आयुर्वेद,अमृत-कलश ले 
धनवंतरि के प्राकट्य की तिथि आयी। 
बर्तन,मूर्ति,सिक्के,श्रृंगारिक साजो-सामान 
 हैं बाज़ार के प्रलोभन,
त्यौहार हैं संस्कृति के अंग 
 दृढ़ रखिये चंचल मन।   
यथाशक्ति कीजिये 
धन तेरस का स्वागत, 
त्यागकर अनुचित अंधानुकरण आग्रह 
संयमित हो तय कीजिये 
त्यौहार की लागत।
ख़ुशियाँ सबके घर-आँगन  छायें,
धन तेरस की मंगलकामनाऐं।  

#रवीन्द्र सिंह यादव    

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

ख़ाकी

समाज को सुरक्षा का एहसास, 
क़ानून की अनुपालना के लिए  
मुकम्मल मुस्तैद मॉनीटर, 
मज़लूमों की इंसाफ़ की गुहार ,
हों गिरफ़्त में मुजरिम-गुनाहगार ,
हादसों में हाज़िर सरकार , 
ख़ाकी को दिया ,
सम्मान और प्यार ,
अफ़सोस कि इस रंग पर ,
रिश्वत ,क्रूरता ,बर्बरता,अमानवीयता,ग़ैर-वाजिब हिंसा ,
विवेकाधिकार का दंभ ,भेदभाव का चश्मा, काला पैसा ,
सत्ता के आगे आत्मसमर्पण ,
पूँजी की चौखट पर तर्पण,
ग़रीब फ़रियादी को दुत्कार ,
आसमां से ऊँचा अहंकार , 
मूल्यों-सिद्धांतों को तिलांजलि !
 दे दी शपथ को  भी   श्रद्धांजलि !!
इतने दाग़-धब्बों के साथ,
ख़ाक में मिल गये  हैं, 
ख़ाकी को मिले अलंकरण ..!!!!!!
यक़ीनन हो समर्पित 
जो किये हैं धारण 
ख़ाकी रंग हूबहू
   उन्हें शत-शत नमन।  

#रवीन्द्र सिंह यादव 

रविवार, 8 अक्तूबर 2017

करवा चौथ


कार्तिक-कृष्णपक्ष  चौथ का चाँद 
देखती हैं सुहागिनें 
आटा  छलनी  से....  
उर्ध्व-क्षैतिज तारों के जाल से दिखता चाँद 
सुनाता है दो दिलों का अंतर्नाद। 


सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प 
होता नहीं जिसका विकल्प 
एक ही अक्स समाया रहता 
आँख से ह्रदय तक 
जीवनसाथी को समर्पित 
निर्जला व्रत  चंद्रोदय तक। 


छलनी से छनकर आती चाँदनी में होती है 
सुरमयी   सौम्य सरस  अतीव  ऊर्जा 
शीतल एहसास से हिय हिलोरें लेता 
होता नज़रों के बीच जब छलनी-सा  पर्दा।  


बे-शक चाँद पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है
उबड़-खाबड़  सतह  पर  कैसा ईश अनुग्रह है ? 
वहां जीवन अनुपलब्ध  है 
न ही ऑक्सीजन उपलब्ध है 
ग्रेविटी  में छह गुना अंतर है 
दूरी 3,84,400 किलोमीटर है 
फिर भी चाँद हमारी संस्कृति की महकती ख़ुशबू है 
जो महकाती है जीवन पल-पल जीवनभर अनवरत......! 


#रवींद्र सिंह यादव 

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत स्वभाव

आज एक चित्र देखा मासूम फटेहाल भाई-बहन किसी आसन्न आशंका से डरे हुए हैं और बहन अपने भाई की गोद में उसके चीथड़े हुए वसन थामे अपना चेहरा छुपाये हुए है -


अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत  स्वभाव, 
देखती हैं नज़रें भाई-बहन के लगाव। 

हो सुरक्षा का एहसास  तो भाई का दामन ,
ढूंढ़ोगे ममता याद आएगा माई का दामन। 

जीवन हमारा है बना  दुःखों  की चक्की, 
पिसते रहेंगे सब  चाहे हों लकी-अनलकी। 

ज़माने से हम भी  हक़  हासिल करेंगे, 
आफ़त पे जीत बे-शक  हासिल करेंगे। 

है प्रभु का शुक्राना  आज सलामत हैं हम, 
किस  लमहे  की  आख़िर ज़मानत हैं हम ?
#रवीन्द्र सिंह यादव 

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